बुधवार, 5 मई 2010

लोग गलत समझते हैं


राह चलते मुड़-मुड़ के यूँ देखा न करो
लोग गलत समझते हैं।

किताबें खोलकर सामने, यूँ खो जाया न करो
 लोग गलत समझते हैं।

चुप बैठे-बैठे, अचानक यूँ मुस्कुराया न करो
 लोग गलत समझते हैं।

बातें करते इतना तो खुश नजर आया न करो
 लोग गलत समझते हैं।

मिलने-बिछुड़ने के नग्मे यूँ गुनगुनाया न करो
 लोग गलत समझते हैं।
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