सोमवार, 7 जून 2010

ऐ साकी / 11-15




(11)
देर से आने का सबब पूछते हो साकी
आज उनसे मिलने का वादा था साकी,
वो आ न सकें, मगर पैगाम भेजवाया
उनके पैरों की मेहन्दी अभी गीली थी साकी।
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(12)
जहाँ में इतना दर्द औगम क्यों है साकी?
हमदर्दों की हैसियत कम क्यों है साकी?
खुदा की खुदाई से यकीं हटायें तो कैसे?
ला पिला दे, और एक जाम पिला दे साकी।
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(13)
न पूछ कि रातें कैसे कटती हैं साकी
न पूछ कि दिन कैसे गुजरते हैं साकी,
पूछना ही है, तो यह पूछ कि हम
हर शाम कैसे तड़पते हैं साकी।
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(14)
हमारी हर हँसी के पीछे खुशी नहीं है साकी
हमारे हर अश्कों के पीछे गम नहीं है साकी
कभी दिल लगाओ, तो जान जाओगे कि-
हमऔर वोमें से हमनहीं हैं साकी।
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(15)
दर्द बाँटने की चीज न रही साकी
जख्म दिखाने की चीज न रही साकी,
हम हैं कि दिल के जख्म दिखा रहें-
वे वाह-वाहकिये जा रहे हैं साकी।
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