बुधवार, 2 जून 2010

ऐ साकी



(1)
उस रोज जितना पिलाया था साकी
आज उससे कहीं ज्यादा पिला दे साकी,
उस रोज वादा किया था मिलने का उन्होंने
आज वो वादा तोड़ दिया है साकी
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(2)
सुना है पुराना मयकदा है यह साकी
अफसाने तुमने बहुत सुने हैं साकी,
हमें भी बताना, वो खुदा की अमानत
किसके लिये बचाके रक्खे हैं साकी
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(3)
शराफत औनजाकत न रही सच है साकी
मुहब्बत औइबादत भी खत्म है साकी,
मगर ऐसा जुल्म न ढाओ हम दिलजलों पर
न कहो, न कहो कि मय खत्मऐ साकी
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(4)
चाँदी के सिक्कों की बात करते हो साकी
वह हम अलमस्तों के पास कहाँ है साकी,
आगे पिलाओ, न पिलाओ मर्जी तुम्हारी
हमने तो उम्र अपनी तुम्हारे नाम कर दी साकी
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(5)
आज हमारे अश्कों का सबब न पूछ ऐ साकी
आज अपने हाथों से ही पिला दे साकी,
हमारे हाथ थक गये, दुआ में उठे हुए आज
आज उनकी डोली रूखसत हुई है साकी
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